महानगरों में चोर-डाकुओं के अड्डों में गुप्त रूप से मुसलमान बन रहे हैं। उनके मुसलमान के साथ खान-पान का समाचार मिलते ही उन्हें जात से खारिज किया जाता है और मौलवी-महंत उनसे कहते हैं, ‘अब तुम मुसलमान बन गए हो, अब सिर्फ नमाज़ पढ़ो, सुन्नत करवाओ। फलाने मुसलमान की बेटी से तुम्हारा निकाह करवा देते हैं।’ उन महंतों के अड्डों पर इन उचक्के युवकों की तरह उचक्की बाजारू लड़कियां भी लार टपकाती हैं। इस तरह हिंदुओं के बच्चे मुसलमान चोरों
महानगरों में चोर-डाकुओं के अड्डों में गुप्त रूप से मुसलमान बन रहे हैं। उनके मुसलमान के साथ खान-पान का समाचार मिलते ही उन्हें जात से खारिज किया जाता है और मौलवी-महंत उनसे कहते हैं, ‘अब तुम मुसलमान बन गए हो, अब सिर्फ नमाज़ पढ़ो, सुन्नत करवाओ। फलाने मुसलमान की बेटी से तुम्हारा निकाह करवा देते हैं।’ उन महंतों के अड्डों पर इन उचक्के युवकों की तरह उचक्की बाजारू लड़कियां भी लार टपकाती हैं। इस तरह हिंदुओं के बच्चे मुसलमान चोरों