क्षीणतर न हो और अन्य जातियों के सामने अपने जातीय जीवन की बलि न चढ़ाई जाए-भ्रष्ट किए गए हिंदुओं का शुद्विकरण करते हैं फिर भले ही वे पतित, नीच क्यों न हों।
क्योंकि वह व्यक्ति, जिसे धर्मभ्रष्ट करने के लिए आप एड़ी-चोटी एक करते हैं, दुष्ट अथवा मद्यपी अथवा पतित भी हो, परंतु गहराई से विचार करें तो आपने इस
समाजिक सत्य को पहचानकर स्मृति में रखा है कि व्यक्ति को अपने नाम से, बल से जैसे-तैसे मुसलमानी अथवा ईसाई धर्म में ठूंसकर
क्षीणतर न हो और अन्य जातियों के सामने अपने जातीय जीवन की बलि न चढ़ाई जाए-भ्रष्ट किए गए हिंदुओं का शुद्विकरण करते हैं फिर भले ही वे पतित, नीच क्यों न हों।
क्योंकि वह व्यक्ति, जिसे धर्मभ्रष्ट करने के लिए आप एड़ी-चोटी एक करते हैं, दुष्ट अथवा मद्यपी अथवा पतित भी हो, परंतु गहराई से विचार करें तो आपने इस
समाजिक सत्य को पहचानकर स्मृति में रखा है कि व्यक्ति को अपने नाम से, बल से जैसे-तैसे मुसलमानी अथवा ईसाई धर्म में ठूंसकर