उनके शुद्विकरण के प्रयास भी आपको उतने ही न्याय्य तथा गंभीर प्रतीत होने चाहिए।
पतितोद्वार की विशेष आवश्यकता
यदि आप हिंदुओं को, फिर चाहे वे कितने ही पतित और नीच क्यों न हों, लोभ, काम, व्यसन का प्रलोभन दिखाकर या हमारे मौलवी साहब जैसे छुरी की नोंक पर धर्मभ्रष्ट करते हैं, वह आप अपना समाज एवं संख्याबल बढ़ाने के लिए, ऐहिक लाभार्थ ही भ्रष्ट करते हैं तो उसी तरह हम हिंदू भी अपना समाज और संख्याबल बढ़ाने और इसलिए कि अपनी संस्कृति
उनके शुद्विकरण के प्रयास भी आपको उतने ही न्याय्य तथा गंभीर प्रतीत होने चाहिए।
पतितोद्वार की विशेष आवश्यकता
यदि आप हिंदुओं को, फिर चाहे वे कितने ही पतित और नीच क्यों न हों, लोभ, काम, व्यसन का प्रलोभन दिखाकर या हमारे मौलवी साहब जैसे छुरी की नोंक पर धर्मभ्रष्ट करते हैं, वह आप अपना समाज एवं संख्याबल बढ़ाने के लिए, ऐहिक लाभार्थ ही भ्रष्ट करते हैं तो उसी तरह हम हिंदू भी अपना समाज और संख्याबल बढ़ाने और इसलिए कि अपनी संस्कृति