को भी शुद्विकरण का कार्य कर इस लड़कपन में भागी होने का मोह न हो। परंतु यदि यह बचपना नहीं है और यदि आपका यह कहना हो कि हजारों सम्राट्, साधु, धर्म-प्रवर्तक और भिक्षु करोड़ों रूपयों को स्वाहा करते हुए विश्व पर अपनी-अपनी संस्कृति तथा धर्म का सिक्का जमाने के लिए सदियों से भरसक चेष्टा कर रहे हैं, तो फिर जिन-जिन हिंदुओं को इसपर विश्वास है कि उनकी संस्कृति और धर्म विश्व भर में प्रचारित होने से विश्व का अंतिम कल्याण अधिक सुलभतापूर्वक तथा निश्चयपूर्वक साध्य होगा,
को भी शुद्विकरण का कार्य कर इस लड़कपन में भागी होने का मोह न हो। परंतु यदि यह बचपना नहीं है और यदि आपका यह कहना हो कि हजारों सम्राट्, साधु, धर्म-प्रवर्तक और भिक्षु करोड़ों रूपयों को स्वाहा करते हुए विश्व पर अपनी-अपनी संस्कृति तथा धर्म का सिक्का जमाने के लिए सदियों से भरसक चेष्टा कर रहे हैं, तो फिर जिन-जिन हिंदुओं को इसपर विश्वास है कि उनकी संस्कृति और धर्म विश्व भर में प्रचारित होने से विश्व का अंतिम कल्याण अधिक सुलभतापूर्वक तथा निश्चयपूर्वक साध्य होगा,