तो क्या लाभ? उनके ऐसे तर्क पर हमारा कहना है कि इनके मुसलमान समाज में अथवा ईसाई समाज में जाने से भी क्या लाभ? परधर्मियों से हम पूछते है। कि आप लोग इतना आकाश-पाताल क्यों एक कर रहे हैं? जो पतित, दुष्ट हैं, वे हमें वैसे ही स्वीकार हैं। आप अपने मोहम्मदीय और ईसाइयों के पवित्र कुलों में उन्हें घसीटकर अपनी पवित्रता क्यों कलंकित तथा भ्रष्ट कर रहे हैं? इस बचपनें के लिए लाखों रूपए पानी की तरह बहाकर उसका आरंभ ही मत करो, ताकि हिंदुओं
तो क्या लाभ? उनके ऐसे तर्क पर हमारा कहना है कि इनके मुसलमान समाज में अथवा ईसाई समाज में जाने से भी क्या लाभ? परधर्मियों से हम पूछते है। कि आप लोग इतना आकाश-पाताल क्यों एक कर रहे हैं? जो पतित, दुष्ट हैं, वे हमें वैसे ही स्वीकार हैं। आप अपने मोहम्मदीय और ईसाइयों के पवित्र कुलों में उन्हें घसीटकर अपनी पवित्रता क्यों कलंकित तथा भ्रष्ट कर रहे हैं? इस बचपनें के लिए लाखों रूपए पानी की तरह बहाकर उसका आरंभ ही मत करो, ताकि हिंदुओं