लुच्चों तथा अपराधियों को मुसलमान बनाने का बचपना क्यों कर रहे हैं? मुसलमान धर्मोंत्मत्त हैं, ठीक! प्रंतु ये सुज्ञ, स्वतंत्र, विचारी यूरोपियन और अमेरिकन लाखों रूपए इकट्ठा करके खर्च करके हिंदुस्थान के पिछड़े गांवों में ही नहीं,
अपितु घने जंगलों में बसे हुए पतित ही नहीं, पशु समान बर्बर, जंगली हिंदुओं को जो ईसाई बनाने के लिए छल-बल, लोभादि के साधनों से अथक प्रयास करते आए हैं, वह भी बचपना ही है क्या? ऐसे लोभी, दुष्ट लोग हिंदू समाज में भी हों,
लुच्चों तथा अपराधियों को मुसलमान बनाने का बचपना क्यों कर रहे हैं? मुसलमान धर्मोंत्मत्त हैं, ठीक! प्रंतु ये सुज्ञ, स्वतंत्र, विचारी यूरोपियन और अमेरिकन लाखों रूपए इकट्ठा करके खर्च करके हिंदुस्थान के पिछड़े गांवों में ही नहीं,
अपितु घने जंगलों में बसे हुए पतित ही नहीं, पशु समान बर्बर, जंगली हिंदुओं को जो ईसाई बनाने के लिए छल-बल, लोभादि के साधनों से अथक प्रयास करते आए हैं, वह भी बचपना ही है क्या? ऐसे लोभी, दुष्ट लोग हिंदू समाज में भी हों,