न कि परधर्मीय पाखंडियों द्वारा। अतः उनमें स्थित कुतर्क का तनिक विवेचन किए बिना पाठक ठीक तरह से इस बात पर गौर नहीं कर सकेंगे कि उस समय अंदमान में ऐसी कौन सी भावना और विचार प्रचलित थे, जो हमें शुद्विकरण का यह कार्य हाथ में लेने के लिए प्रवृत्त कर रहे थे।
शुद्विकरण खेल नहीं
हिंदू सामज में जनमें पतितों, लुच्चों तथा अपराधियों को विधर्म में जाने से रोकने के प्रयास करना यदि बचपना है तो आज मुसलमान लोग हजारों बरसों से युद्व करके भी हिदूं पतितों,
न कि परधर्मीय पाखंडियों द्वारा। अतः उनमें स्थित कुतर्क का तनिक विवेचन किए बिना पाठक ठीक तरह से इस बात पर गौर नहीं कर सकेंगे कि उस समय अंदमान में ऐसी कौन सी भावना और विचार प्रचलित थे, जो हमें शुद्विकरण का यह कार्य हाथ में लेने के लिए प्रवृत्त कर रहे थे।
शुद्विकरण खेल नहीं
हिंदू सामज में जनमें पतितों, लुच्चों तथा अपराधियों को विधर्म में जाने से रोकने के प्रयास करना यदि बचपना है तो आज मुसलमान लोग हजारों बरसों से युद्व करके भी हिदूं पतितों,