राजबंदियों में से किसी को भी लिखने का काम नहीं दिया जाता। उन्हें इतने कठोर परिश्रम के काम दिए जाते हैं जो उन्हांेने अपने जीवन में कभी नहीं किए। कदाचित् उन्हें केवल स्पेलिंग लिखने से कई गुना अधिक
अंग्रेेजी का ज्ञान था। उनकी इस शिक्षा की न्यूवता के कारण हो सकता है वे लिखने का काम करने के लिए अपात्र समझे गए हों।
तथापि काम भले ही कठोर परिश्रम का हो, पर जी-तोड़ परिश्रम करते-करते भी सभी एक साथ रह सकते थे। यही लाभ उन समाजप्रिय
राजबंदियों में से किसी को भी लिखने का काम नहीं दिया जाता। उन्हें इतने कठोर परिश्रम के काम दिए जाते हैं जो उन्हांेने अपने जीवन में कभी नहीं किए। कदाचित् उन्हें केवल स्पेलिंग लिखने से कई गुना अधिक
अंग्रेेजी का ज्ञान था। उनकी इस शिक्षा की न्यूवता के कारण हो सकता है वे लिखने का काम करने के लिए अपात्र समझे गए हों।
तथापि काम भले ही कठोर परिश्रम का हो, पर जी-तोड़ परिश्रम करते-करते भी सभी एक साथ रह सकते थे। यही लाभ उन समाजप्रिय