शिक्षित मनुष्यों को सुखद प्रतीत होता था। उनमें से एक-दो जन रोगग्रस्त थे, जिस कारण उन्हें दूध मिलता। वह दूध उस पठान अधिकारी कोे, जिसे उन पर नियुक्त किया जाता, भोग के रूप में गुपचुप चढ़ाए जाने के कारण वह क्रूर देवता भी थोड़ा-बहुत कम उग्र प्रतीत होता। इन दो बातों के कारण कुछ मिलाकर उस समय कारागृहवासी राजबंदियों की अवस्था कारागृह की तुलना में इतनी दुःसह नहीं थी। मेरे अग्रज भी उसी भवन में रहा करते थे।
परंतु कुछ महीने इस तरह
शिक्षित मनुष्यों को सुखद प्रतीत होता था। उनमें से एक-दो जन रोगग्रस्त थे, जिस कारण उन्हें दूध मिलता। वह दूध उस पठान अधिकारी कोे, जिसे उन पर नियुक्त किया जाता, भोग के रूप में गुपचुप चढ़ाए जाने के कारण वह क्रूर देवता भी थोड़ा-बहुत कम उग्र प्रतीत होता। इन दो बातों के कारण कुछ मिलाकर उस समय कारागृहवासी राजबंदियों की अवस्था कारागृह की तुलना में इतनी दुःसह नहीं थी। मेरे अग्रज भी उसी भवन में रहा करते थे।
परंतु कुछ महीने इस तरह