मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

बीतने के पश्चात् कलकत्ता से निरीक्षणार्थ एक पुलिस अधिकारी अंदमान आ गए। उन्होंने जब देखा, राजबंदी ‘छिलका’ कूट रहे हैं और उन्हें थोड़ी दूरी पर किंतू एक साथ ही रखा गया है, तब उन्हें स्वाभाविक रूप में ही खेद हुआ कि बंदीशाला में भी मनुष्य के साथ इतनी मानवता का व्यवहार किया जाता है। उन्हांेने अंदमान के अधिकारियों के कान ऐंठे और उन स्थानीय, अनाड़ी अधिकारियों के मन में एक उच्च राजनीतिक तत्व का मर्म बैठाया कि- यह बंदी किसी खूनी,


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बीतने के पश्चात् कलकत्ता से निरीक्षणार्थ एक पुलिस अधिकारी अंदमान आ गए। उन्होंने जब देखा, राजबंदी ‘छिलका’ कूट रहे हैं और उन्हें थोड़ी दूरी पर किंतू एक साथ ही रखा गया है, तब उन्हें स्वाभाविक रूप में ही खेद हुआ कि बंदीशाला में भी मनुष्य के साथ इतनी मानवता का व्यवहार किया जाता है। उन्हांेने अंदमान के अधिकारियों के कान ऐंठे और उन स्थानीय, अनाड़ी अधिकारियों के मन में एक उच्च राजनीतिक तत्व का मर्म बैठाया कि- यह बंदी किसी खूनी,


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