चोर-डाकू जैसे सदाशय, दयालु मानव नहीं हैं अपितु ये राजबंदी महाबदमाश हैं- इनसे ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे उनका घमंड चूर-चूर हो जाए।
कोल्हू
तब से व्यवस्था बदल गई। उन राजबंदियों को अलग-अलग चालियों में अकेले-अकेले ही बंद किया गया। यदि वे आपस में वार्त्तालाप करते तो बेड़ियां, हथकड़ियां आदि की जोरदार भरमार होने लगती। स्नान कुंड पर अथवा भोजनार्थ दूर बैठकर केवल ‘ठीक है न’ जैसे संकेत से कुशल पूछने पर भी सात-सात दिनों तक हथकड़ियां
चोर-डाकू जैसे सदाशय, दयालु मानव नहीं हैं अपितु ये राजबंदी महाबदमाश हैं- इनसे ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे उनका घमंड चूर-चूर हो जाए।
कोल्हू
तब से व्यवस्था बदल गई। उन राजबंदियों को अलग-अलग चालियों में अकेले-अकेले ही बंद किया गया। यदि वे आपस में वार्त्तालाप करते तो बेड़ियां, हथकड़ियां आदि की जोरदार भरमार होने लगती। स्नान कुंड पर अथवा भोजनार्थ दूर बैठकर केवल ‘ठीक है न’ जैसे संकेत से कुशल पूछने पर भी सात-सात दिनों तक हथकड़ियां