‘‘वह मेरा सरदर्द नहीं, डाॅक्टर को दिखाओ।’’ डाॅक्टर कोई हिंदुस्थानी ही होगा। वह आकर देखता-ज्वर है या नहीं और कह देता-इसे कुछ नहीं है। साहब के पास ले जाओ। क्यांेकि सिर की पीड़ा से तापमानी (थर्मामीटर) जरा भी तप्त नहीं होता। मस्तिष्क की पीड़ा को सिद्व करने के लिए अन्य कोई भी प्रमाण नहीं। अर्थात् इसमें अवश्य कोई चाल होगी बंदियों की इसमें भी राजबंदियों की, इसमें भी गणेशपंत सावरकर की गहरी चाल ं ं ं ं।
मैं कहूं वही रोगी
डाॅक्टर जानता था कि वह जो कर रहा है वह अन्याय है,
‘‘वह मेरा सरदर्द नहीं, डाॅक्टर को दिखाओ।’’ डाॅक्टर कोई हिंदुस्थानी ही होगा। वह आकर देखता-ज्वर है या नहीं और कह देता-इसे कुछ नहीं है। साहब के पास ले जाओ। क्यांेकि सिर की पीड़ा से तापमानी (थर्मामीटर) जरा भी तप्त नहीं होता। मस्तिष्क की पीड़ा को सिद्व करने के लिए अन्य कोई भी प्रमाण नहीं। अर्थात् इसमें अवश्य कोई चाल होगी बंदियों की इसमें भी राजबंदियों की, इसमें भी गणेशपंत सावरकर की गहरी चाल ं ं ं ं।
मैं कहूं वही रोगी
डाॅक्टर जानता था कि वह जो कर रहा है वह अन्याय है,