मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

के बाद सतत उसे घुमाने से जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता वैसे ही उनके सिर मे असह्म पीड़ा होती जाती, असीम वेदना से वे छअपटाते। धूप भी सही नहीं जाती, तथापि जैसे-जैसे दिन चढ़ता वैसे ही बढ़ती हुई तीव्र पीड़ा की वेदना के साथ-साथ ‘कोल्हू’ पेलो और कुछ नहीं जानता, चलो कोल्हू पेलो’ की जमादार की अशिष्ट गर्जनाएं भी बढ़ती जाती। गोरे अधिकारी के दौरे पर आते ही उन्होंने उनके सामने निवेदन-पत्र रखा-‘‘मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है।’’ उन्होंने उत्तर दिया,


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के बाद सतत उसे घुमाने से जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता वैसे ही उनके सिर मे असह्म पीड़ा होती जाती, असीम वेदना से वे छअपटाते। धूप भी सही नहीं जाती, तथापि जैसे-जैसे दिन चढ़ता वैसे ही बढ़ती हुई तीव्र पीड़ा की वेदना के साथ-साथ ‘कोल्हू’ पेलो और कुछ नहीं जानता, चलो कोल्हू पेलो’ की जमादार की अशिष्ट गर्जनाएं भी बढ़ती जाती। गोरे अधिकारी के दौरे पर आते ही उन्होंने उनके सामने निवेदन-पत्र रखा-‘‘मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है।’’ उन्होंने उत्तर दिया,


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