समझा जाता। रात में बंदीवानों को छह-सात बजे ही जो बंद किया जाता तो सुबह छह बजे द्वार खोला जाता। उस अवधिक में लघुशंका के लिए केवल एक मटका भीतर रखा जाता। अंदमान के बंदीगृह में सभी कोठरियां अलग-अलग थी और प्रत्येक में एक ही बंदी को बंद किया जाता। बारी साहब का नीति-नियम था कि रात्रि के इन बारह घंटों में किसी बंदी को शौच नहीं होना चाहिए। वह मटका भी इतना छोटा होता कि लघुशंका के लिए भी पूरा नहीं पड़ता। किसी को शौच जाना हो तो उसे
समझा जाता। रात में बंदीवानों को छह-सात बजे ही जो बंद किया जाता तो सुबह छह बजे द्वार खोला जाता। उस अवधिक में लघुशंका के लिए केवल एक मटका भीतर रखा जाता। अंदमान के बंदीगृह में सभी कोठरियां अलग-अलग थी और प्रत्येक में एक ही बंदी को बंद किया जाता। बारी साहब का नीति-नियम था कि रात्रि के इन बारह घंटों में किसी बंदी को शौच नहीं होना चाहिए। वह मटका भी इतना छोटा होता कि लघुशंका के लिए भी पूरा नहीं पड़ता। किसी को शौच जाना हो तो उसे