हॅंाडी के चावल परखने के लिए एक उदाहरण देता हूं। अंदमान में बंदीवास में कामकाज, अन्न-वस्त्र, मारपीट आदि कई प्रकार से त्रास दिया जाता है, उसमें एक ऐसा था जो देखने में साधारण, कहने में संकोचास्पद, परंतु जिसे सहने में अपने आपसे घिन होने लगती और ऐसा प्रतीत होता जैसे भगवान् जीवन से उठा ले तो अच्छा। वह कष्ट था-बंदियों को मल-मूत्र का अवरोध करने के लिए बाध्य करना। सवेरे, दोपहर, शाम-इस समय के अतिरिक्त शौच जाना लगभग जघन्य अपराध
हॅंाडी के चावल परखने के लिए एक उदाहरण देता हूं। अंदमान में बंदीवास में कामकाज, अन्न-वस्त्र, मारपीट आदि कई प्रकार से त्रास दिया जाता है, उसमें एक ऐसा था जो देखने में साधारण, कहने में संकोचास्पद, परंतु जिसे सहने में अपने आपसे घिन होने लगती और ऐसा प्रतीत होता जैसे भगवान् जीवन से उठा ले तो अच्छा। वह कष्ट था-बंदियों को मल-मूत्र का अवरोध करने के लिए बाध्य करना। सवेरे, दोपहर, शाम-इस समय के अतिरिक्त शौच जाना लगभग जघन्य अपराध