को बता देता। डाॅक्टर का शौच लगने विषयक प्रमाण-पत्र सौ में से एकाध बार मिलेगा। फिर वह बारी तक पहुंचता और उसकी इच्छा हुई तो ताला खोलकर उस बंदी को शौच जाने के लिए निकाला जाता। उस पर प्रातःकाल में बारी साहब के सामने पूछताछ में ऐसा प्रश्न पूछा जाता जिसका किसी भी बंदी को संतोषजनक उत्तर नहीं सूझता। फिर गालियांे की बौछार होती सो अलग। ‘क्यांे बे, तुमने रात भर इतना हल्ला-गुल्ला क्यांे किया?’’ क्या करता हुजूर! जोर से टट्टी लगी थी।
को बता देता। डाॅक्टर का शौच लगने विषयक प्रमाण-पत्र सौ में से एकाध बार मिलेगा। फिर वह बारी तक पहुंचता और उसकी इच्छा हुई तो ताला खोलकर उस बंदी को शौच जाने के लिए निकाला जाता। उस पर प्रातःकाल में बारी साहब के सामने पूछताछ में ऐसा प्रश्न पूछा जाता जिसका किसी भी बंदी को संतोषजनक उत्तर नहीं सूझता। फिर गालियांे की बौछार होती सो अलग। ‘क्यांे बे, तुमने रात भर इतना हल्ला-गुल्ला क्यांे किया?’’ क्या करता हुजूर! जोर से टट्टी लगी थी।