क्षमा कीजिए हुजूर।’ तब अपनी सोटी पटककर पानी पी-पीकर उसे कोसते हुए साहब पूछते,‘पर क्यों लगा था पाखाना? बोल साले, रात के समय टट्टी क्यों लगी?’ सकपकाया हुआ बंदी हड़बड़ाते हुए कहता, ‘लगी, इसीलिए लगी। जमादार तुरंत उसे एक थप्पड़ रसीद करते हुए कहता, ‘ऐ साला, साहब का मजाक उड़ाता है? ‘दयावान बारी साहब इतने पर ही उस बंदी को प्रायः छोड़ देते। कभी वे बहुत ही द्रवित हुए तो उसे इतने पर न छोड़ते हुए यह आदेश देकर चले जाते कि ‘इसे एक दिन के लिए कोल्हू पेरने का काम दे दो।’
क्षमा कीजिए हुजूर।’ तब अपनी सोटी पटककर पानी पी-पीकर उसे कोसते हुए साहब पूछते,‘पर क्यों लगा था पाखाना? बोल साले, रात के समय टट्टी क्यों लगी?’ सकपकाया हुआ बंदी हड़बड़ाते हुए कहता, ‘लगी, इसीलिए लगी। जमादार तुरंत उसे एक थप्पड़ रसीद करते हुए कहता, ‘ऐ साला, साहब का मजाक उड़ाता है? ‘दयावान बारी साहब इतने पर ही उस बंदी को प्रायः छोड़ देते। कभी वे बहुत ही द्रवित हुए तो उसे इतने पर न छोड़ते हुए यह आदेश देकर चले जाते कि ‘इसे एक दिन के लिए कोल्हू पेरने का काम दे दो।’