मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

हो सके उतना काम करें और कारागार के नियमों का पालन करें। परंतु जब शारीरिक तथा मानसिक कष्ट असह्म होने लगे, तब सभी के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि ‘जिएं या मरें’ । दूसरों का आग्रह था कि जो संकट हम अब तक सहते


आए हैं, वही आजीवन सहने होंगे। उन्हें सहते हुए जीने से तो अच्छा है कि लड़ते-लड़ते मर जाएं।

इस भयंकर समस्या का, जो उस अवस्था में तात्तिवक रूप से नहीं अपितु प्रति पल प्रत्यक्ष सामने खड़ी रहती थी, राजबंदियों के दो छोरों


468 of 2228

हो सके उतना काम करें और कारागार के नियमों का पालन करें। परंतु जब शारीरिक तथा मानसिक कष्ट असह्म होने लगे, तब सभी के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि ‘जिएं या मरें’ । दूसरों का आग्रह था कि जो संकट हम अब तक सहते


आए हैं, वही आजीवन सहने होंगे। उन्हें सहते हुए जीने से तो अच्छा है कि लड़ते-लड़ते मर जाएं।

इस भयंकर समस्या का, जो उस अवस्था में तात्तिवक रूप से नहीं अपितु प्रति पल प्रत्यक्ष सामने खड़ी रहती थी, राजबंदियों के दो छोरों


468 of 2228