की प्रत्यक्ष अनुभूति होने लगती। स्वयं उस नंदगोपाल को भी एक बार चाली में काम करते समय मलावरोध असंभव होने पर सभी के सामने शौच का घिनौना प्रसंग आ गया था, तो ‘उसने जान-बुझकर यह कृत्य किया’ इस तरह उसके विरूद्व चुगली खाकर बारी ने उसे अपराधी घोषित किया था।
प्रथम हड़ताल
नाना प्रकार के उन अत्याचारों की उस समय उपस्थित राजबंदियों मंे विभिन्न प्रकार से प्रतिक्रिया हुई। प्रथमतः सभी का उद्देश्य यह था कि यथासंभव यातनाएं झेलकर जितना
की प्रत्यक्ष अनुभूति होने लगती। स्वयं उस नंदगोपाल को भी एक बार चाली में काम करते समय मलावरोध असंभव होने पर सभी के सामने शौच का घिनौना प्रसंग आ गया था, तो ‘उसने जान-बुझकर यह कृत्य किया’ इस तरह उसके विरूद्व चुगली खाकर बारी ने उसे अपराधी घोषित किया था।
प्रथम हड़ताल
नाना प्रकार के उन अत्याचारों की उस समय उपस्थित राजबंदियों मंे विभिन्न प्रकार से प्रतिक्रिया हुई। प्रथमतः सभी का उद्देश्य यह था कि यथासंभव यातनाएं झेलकर जितना