उनके इस बेधड़क बोलने के कारण यद्यपि नंदगोपाल को ‘चुप रहो! च्ुाप रहो! क्हकर चुप किया गया और बारी के पालतू राजबंदियों में से एक-दो जन इसे अश्लील एंव अशिष्ट घोषित करने की चापलूसी करने में रत्ती भर नहीं हिचकिचाए, तथापि गृहमंत्री ने गुपचुप बारी के कान उमेठे और भविष्य में यह घिनौना कष्ट कम हो गया। वाकई यह इतना घिनौना, भद्दा कष्ट था कि अपनी देह से भी घृणा होने लगती। ‘स्वांगजुगुप्सा परैरसंगश्च’ के रूप में योगसूत्र में वर्णित सत्य
उनके इस बेधड़क बोलने के कारण यद्यपि नंदगोपाल को ‘चुप रहो! च्ुाप रहो! क्हकर चुप किया गया और बारी के पालतू राजबंदियों में से एक-दो जन इसे अश्लील एंव अशिष्ट घोषित करने की चापलूसी करने में रत्ती भर नहीं हिचकिचाए, तथापि गृहमंत्री ने गुपचुप बारी के कान उमेठे और भविष्य में यह घिनौना कष्ट कम हो गया। वाकई यह इतना घिनौना, भद्दा कष्ट था कि अपनी देह से भी घृणा होने लगती। ‘स्वांगजुगुप्सा परैरसंगश्च’ के रूप में योगसूत्र में वर्णित सत्य