मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

रामकहानी आगे आनेवाली है- तब राजबंदियों में से कुछ जनों ने उनके सामने अपनी बात कही। बारी उलट गया और बोला, झूठ बोलते हैं एक पंजाबी राजबंदी नदंगोपाल ने खरी-खरी सुनाई, ‘‘देखिए, इस बंदीगृह की कोठरियांे में आप एक बार स्वयं चक्कर लगाइए, वहां की दीवारों के कोनों की दुर्गध देखिए, तब आपको पता चलेगा कि असमय लघंशंका लगने अथवा रात्रि को मटका भर जाने से बंदियों को दीवार पर लघुशंका करनी पड़ती है या नहीं। आपकी नाक ही हमारी साक्षी है।’’


465 of 2228

रामकहानी आगे आनेवाली है- तब राजबंदियों में से कुछ जनों ने उनके सामने अपनी बात कही। बारी उलट गया और बोला, झूठ बोलते हैं एक पंजाबी राजबंदी नदंगोपाल ने खरी-खरी सुनाई, ‘‘देखिए, इस बंदीगृह की कोठरियांे में आप एक बार स्वयं चक्कर लगाइए, वहां की दीवारों के कोनों की दुर्गध देखिए, तब आपको पता चलेगा कि असमय लघंशंका लगने अथवा रात्रि को मटका भर जाने से बंदियों को दीवार पर लघुशंका करनी पड़ती है या नहीं। आपकी नाक ही हमारी साक्षी है।’’


465 of 2228