सहनीय न भी लगें तो लातों-घूंसों की धुनाई तथा कोल्हू के भय से बारी साहब के विरूद्व चूं तक करने की उनकी हिम्मत नहीं होती।
नैसर्गिक विधि का अधिकार
आखिर शौच और लघुशंका लगना अथवा लगने पर उसका अवरोध असंभव होने पर उसकी अनुतमि मांगना अनुशासन-भंग अथवा अपराध नहीं है- यह निश्चित करने का महत्तवपूर्ण राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने के लिए हिंदूस्थान सरकार के गृहमंत्री तक को आंदोलन छेड़ना पड़ा। ये सज्जन एक बार अंदमान में स्वयं पधारे-वह
सहनीय न भी लगें तो लातों-घूंसों की धुनाई तथा कोल्हू के भय से बारी साहब के विरूद्व चूं तक करने की उनकी हिम्मत नहीं होती।
नैसर्गिक विधि का अधिकार
आखिर शौच और लघुशंका लगना अथवा लगने पर उसका अवरोध असंभव होने पर उसकी अनुतमि मांगना अनुशासन-भंग अथवा अपराध नहीं है- यह निश्चित करने का महत्तवपूर्ण राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने के लिए हिंदूस्थान सरकार के गृहमंत्री तक को आंदोलन छेड़ना पड़ा। ये सज्जन एक बार अंदमान में स्वयं पधारे-वह