मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

परंतु बारी साहब कहते,‘यह सब सरासर मिथ्या आरोप है। इस जमादार से पूछिए तो सही कि मैं कभी इस तरह की पीड़ा देता हूं क्या? ये लोग मेरी इच्छा के विरूद्व इस तरह षड्यंत्र करते हैं और मुझपर मिथ्या आरोप लगाते हैं। ‘कमिश्नर और अन्य अधिकारी धमकाते, ‘पुनः इस तरह मिथ्या आरोप लगाया तो सजा भोगनी


पड़ेगी। तुम राजबंदी ही व्यर्थ हल्ला मचाते हो। अन्य लोेग क्यांे नहीं कहते?’ अन्य लोगों को यह अत्याचार इतने भुगतने नहीं पड़ते। और भुगतने पड़ते भी तो उन्हें वे सह्म प्रतीत होते,


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परंतु बारी साहब कहते,‘यह सब सरासर मिथ्या आरोप है। इस जमादार से पूछिए तो सही कि मैं कभी इस तरह की पीड़ा देता हूं क्या? ये लोग मेरी इच्छा के विरूद्व इस तरह षड्यंत्र करते हैं और मुझपर मिथ्या आरोप लगाते हैं। ‘कमिश्नर और अन्य अधिकारी धमकाते, ‘पुनः इस तरह मिथ्या आरोप लगाया तो सजा भोगनी


पड़ेगी। तुम राजबंदी ही व्यर्थ हल्ला मचाते हो। अन्य लोेग क्यांे नहीं कहते?’ अन्य लोगों को यह अत्याचार इतने भुगतने नहीं पड़ते। और भुगतने पड़ते भी तो उन्हें वे सह्म प्रतीत होते,


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