में यथाससमय मल-मूत्र त्याग करने में रूकावट डालना क्रूरता समझी जाती है। परंतु वह व्यक्ति, जो राजनीति अथवा राज्यक्रांति में हिस्सा लेता है, पशु को प्राप्त स्वाधीनता के लिए भी अपात्र समझाा जाता और दोपहर बारह से छह बजे तक और पूरी रात यह सुविधा प्राप्त करने का साहस करता तो दंड का पात्र होता- यही अंदमानीय नीतिशास्त्र का नियम था। अंदमान के बंदीगृह में दंडविज्ञान के इस नीतिशास्त्र में परिवर्तन करने के लिए कमिश्नर तक आवेदन-पत्र गए,
में यथाससमय मल-मूत्र त्याग करने में रूकावट डालना क्रूरता समझी जाती है। परंतु वह व्यक्ति, जो राजनीति अथवा राज्यक्रांति में हिस्सा लेता है, पशु को प्राप्त स्वाधीनता के लिए भी अपात्र समझाा जाता और दोपहर बारह से छह बजे तक और पूरी रात यह सुविधा प्राप्त करने का साहस करता तो दंड का पात्र होता- यही अंदमानीय नीतिशास्त्र का नियम था। अंदमान के बंदीगृह में दंडविज्ञान के इस नीतिशास्त्र में परिवर्तन करने के लिए कमिश्नर तक आवेदन-पत्र गए,