कई बार हथकड़ियों में लटकाने पर पेट की पीड़ा तथा दस्त का विकार होने के बावजुद उन्हें रात दिन वैसे ही लटकाए रखा जाता। कई बार उस समय खड़े-खडे़ ही दस्त करते। दोपहर बाद लघुशंका लगते ही कोठरी की भीत पर कई बंदी पेशाब की धरा छोड़ते। यह एक दिन अथवा एक प्रसंग की बात नहीं थी, वर्षों की बात थी। ऐसी ही गंदगी भरी कोठरी में घिनौनी देहावस्था में सोना पड़ता। मूत्र की भकांव भरी कोठरी में।
चैपायों को भी काम में जुटे होने पर अथवा रात-बेरात
कई बार हथकड़ियों में लटकाने पर पेट की पीड़ा तथा दस्त का विकार होने के बावजुद उन्हें रात दिन वैसे ही लटकाए रखा जाता। कई बार उस समय खड़े-खडे़ ही दस्त करते। दोपहर बाद लघुशंका लगते ही कोठरी की भीत पर कई बंदी पेशाब की धरा छोड़ते। यह एक दिन अथवा एक प्रसंग की बात नहीं थी, वर्षों की बात थी। ऐसी ही गंदगी भरी कोठरी में घिनौनी देहावस्था में सोना पड़ता। मूत्र की भकांव भरी कोठरी में।
चैपायों को भी काम में जुटे होने पर अथवा रात-बेरात