पोत की तरह उफनकर तीव्र आवेग के साथ उभरकर उत्तोजित करने लगी, ‘मरो, परंतु अपमान मत सहना। मरो, पर यथासंभव संघर्ष करते-करते मरो।’ उनसे जो बीच की मनोवृत्तिायांे के थे, उनके विवेक ने कहा, ‘जियो! जबतक अपने ध्येय के विरूद्व तुम्हारा जीना नहीं होता तबतक यथासंभव राजनीति के आश्रय के साथ जियो। हां, यदि ध्येय के विरूद्व ध्येय की अंतिम हानि करके ही जीना अनिवार्य हो तो त्वरित प्राण त्याग करो।’
पीछे बताया गया है कि जिनकी प्रवृत्तिा येनकेन प्रकारेण जीवित रहने के लिए उकसा रही थी,
पोत की तरह उफनकर तीव्र आवेग के साथ उभरकर उत्तोजित करने लगी, ‘मरो, परंतु अपमान मत सहना। मरो, पर यथासंभव संघर्ष करते-करते मरो।’ उनसे जो बीच की मनोवृत्तिायांे के थे, उनके विवेक ने कहा, ‘जियो! जबतक अपने ध्येय के विरूद्व तुम्हारा जीना नहीं होता तबतक यथासंभव राजनीति के आश्रय के साथ जियो। हां, यदि ध्येय के विरूद्व ध्येय की अंतिम हानि करके ही जीना अनिवार्य हो तो त्वरित प्राण त्याग करो।’
पीछे बताया गया है कि जिनकी प्रवृत्तिा येनकेन प्रकारेण जीवित रहने के लिए उकसा रही थी,