रूप में काम करने के लिए अंगूठा दिखाते ही सैकड़ों बंदियों में मानसिक खलबली मच गई। उसी तरह यह सोचकर कि अपनी शक्ति एवं अधिकार को नीचा दिखाया गया है, वह बंदीपाल बौखला गया । बेचारा भोला बारी! भला कैसे समझेगा कि यह हड़ताल, यह अपमान कुछ भी नहीं है, आगे चलकर अभी उसको ऐसी कितनी हड़तालें और अपमान देखने हैं।
पोर्ट ब्लेअर का ईश्वर
बारी साहब अन्य बंदियों से और कभी-कभी राजबंदियों से भी अपना सुविख्यात मोटा सोटा धड़ाम से पटककर कहता, ‘देखो रे, साला लोग! (साला लोग बारी साहब
रूप में काम करने के लिए अंगूठा दिखाते ही सैकड़ों बंदियों में मानसिक खलबली मच गई। उसी तरह यह सोचकर कि अपनी शक्ति एवं अधिकार को नीचा दिखाया गया है, वह बंदीपाल बौखला गया । बेचारा भोला बारी! भला कैसे समझेगा कि यह हड़ताल, यह अपमान कुछ भी नहीं है, आगे चलकर अभी उसको ऐसी कितनी हड़तालें और अपमान देखने हैं।
पोर्ट ब्लेअर का ईश्वर
बारी साहब अन्य बंदियों से और कभी-कभी राजबंदियों से भी अपना सुविख्यात मोटा सोटा धड़ाम से पटककर कहता, ‘देखो रे, साला लोग! (साला लोग बारी साहब