मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

दिल्ली के लाट साहब के पास चले और हमें यह दिखाकर कि सभी जो मैं कहूंगा।’ एक बार हम लोगों को मजा चखाने के लिए और हमें यह दिखाकर कि सभी बंदी उससे कितने भयभीत हैं- हम पर सिक्का जमाने की सुप्त इच्छा से उसने सभी बंदियों की दो-दो की लंबी पंक्तियां बैठाकर पेटी अफसरों और सैनिक जमादारों की उपस्थिति में भी एकदम भीतर घुसकर पूछा, ‘‘क्यों बे पेटी अफसर, अभी दिन है या रात?’’ उस नौसिखिया अधिकारी ने, जो स्वयं बंदी ही था और अभी-अभी जिसे तरक्की मिली थी,


474 of 2228

दिल्ली के लाट साहब के पास चले और हमें यह दिखाकर कि सभी जो मैं कहूंगा।’ एक बार हम लोगों को मजा चखाने के लिए और हमें यह दिखाकर कि सभी बंदी उससे कितने भयभीत हैं- हम पर सिक्का जमाने की सुप्त इच्छा से उसने सभी बंदियों की दो-दो की लंबी पंक्तियां बैठाकर पेटी अफसरों और सैनिक जमादारों की उपस्थिति में भी एकदम भीतर घुसकर पूछा, ‘‘क्यों बे पेटी अफसर, अभी दिन है या रात?’’ उस नौसिखिया अधिकारी ने, जो स्वयं बंदी ही था और अभी-अभी जिसे तरक्की मिली थी,


474 of 2228