कहा,‘‘दिन है हुजूर!’’ बारी साहब एकदम बिगड़कर बोला,-‘‘ना-ना, रात है।’’ पेटी अफसर ने कहा,‘‘ दिन है।’’ बस, बारी साहब का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और वह अपने पुराने मुरब्बी जमादार की ओर मुड़कर जोर से चिंघाड़ा, ‘‘क्यों बे जमादार, अब दिन है या रात? हमें तो साफ-साफ रात दिखाई दे रही है।’’ जमादार ने कहा,‘‘जी हुजूर, अब तो साफ रात हो गई है।’’ तब बारी साहब ने तनिक चुभते हुए स्वर में ताना मारा, ‘‘तुमने तो ठीक कहा, परंतु यह सच भी साफ
कहा,‘‘दिन है हुजूर!’’ बारी साहब एकदम बिगड़कर बोला,-‘‘ना-ना, रात है।’’ पेटी अफसर ने कहा,‘‘ दिन है।’’ बस, बारी साहब का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और वह अपने पुराने मुरब्बी जमादार की ओर मुड़कर जोर से चिंघाड़ा, ‘‘क्यों बे जमादार, अब दिन है या रात? हमें तो साफ-साफ रात दिखाई दे रही है।’’ जमादार ने कहा,‘‘जी हुजूर, अब तो साफ रात हो गई है।’’ तब बारी साहब ने तनिक चुभते हुए स्वर में ताना मारा, ‘‘तुमने तो ठीक कहा, परंतु यह सच भी साफ