उदाहरणार्थ एक ही रंजक घटना सुनाता हूं। श्रीयुत् नंदगोपाल को दस वर्ष के लिए कालेपानी का दंड मिला था। वे पंजाब स्थित एक अत्यंत सभ्य-सुशील घराने के
शिक्षित एवं अत्यंत पापभीरू सज्जन थे। उन्हें पहली बार जब कोल्हू पेरने का काम दिया गया तब वे प्रातःकाल के समय कोठरी में गए। लगभग दस बजे तक धीरे-धीरे उतना काम निपटाया जितना उनसे बन पड़ा। भोजन की घंटी बजते ही नंदगोपाल¹ नीचे उतरे। कोल्हू से जुड़े हुए बंदी को, जब तक वह अपना काम पूरा नहीं करता तब तक,
उदाहरणार्थ एक ही रंजक घटना सुनाता हूं। श्रीयुत् नंदगोपाल को दस वर्ष के लिए कालेपानी का दंड मिला था। वे पंजाब स्थित एक अत्यंत सभ्य-सुशील घराने के
शिक्षित एवं अत्यंत पापभीरू सज्जन थे। उन्हें पहली बार जब कोल्हू पेरने का काम दिया गया तब वे प्रातःकाल के समय कोठरी में गए। लगभग दस बजे तक धीरे-धीरे उतना काम निपटाया जितना उनसे बन पड़ा। भोजन की घंटी बजते ही नंदगोपाल¹ नीचे उतरे। कोल्हू से जुड़े हुए बंदी को, जब तक वह अपना काम पूरा नहीं करता तब तक,