विरूद्व जेल में काम करवाता रहता था। अंत में ‘तुम चाहे जितनी जुगाी करते रहो, परंतु यदि संध्या होते तक काम पूरा नहीं किया तो बंेत से तुम्हारी पीठ की खाल उधेड़ दूंगा’-इस तरह उसे धमकाते हुए और सभी बंदियों के सामने अपनी आज्ञा का अपमान करने पर भी अन्य कैदियों की
तरह उसकी तत्काल धुनाई नहीं कर सका, इसके अपमान से लाल-पीला होते हुए हाथ मलता, पैर पटकता बारी वापस चला गया।
वैद्यक शास्त्र का एक और प्रमेय
इधर श्रीमान का जैसे-तैसे भोजन निपटा। पेटी अफसर,
विरूद्व जेल में काम करवाता रहता था। अंत में ‘तुम चाहे जितनी जुगाी करते रहो, परंतु यदि संध्या होते तक काम पूरा नहीं किया तो बंेत से तुम्हारी पीठ की खाल उधेड़ दूंगा’-इस तरह उसे धमकाते हुए और सभी बंदियों के सामने अपनी आज्ञा का अपमान करने पर भी अन्य कैदियों की
तरह उसकी तत्काल धुनाई नहीं कर सका, इसके अपमान से लाल-पीला होते हुए हाथ मलता, पैर पटकता बारी वापस चला गया।
वैद्यक शास्त्र का एक और प्रमेय
इधर श्रीमान का जैसे-तैसे भोजन निपटा। पेटी अफसर,