तो तब आजी जब मैं भी बचपन से ही उसके समान कुलीगिरी करने का आदी होता। यदि आप उसे एक घंटे के अंदर एक सुनीत (साॅनेट) रचने के लिए कहें तो क्या वह रच सकेगा? मैं आपको आधे घंटे के अंदर रचना करके दिखाता हूं। परंतु इसलिए आप यदि उस श्रमिक को ताना मारें कि ‘अरे, तुम साॅनेट की रचना शीर्घतीपूर्वक नहीं कर सके, इसके लिए
तुम्हें लाज आनी चाहिए’ तब क्या कहेगा वह, ‘बचपन से कविता करना मुझे किसी ने सिखाया नहीं।’ अपने कार्यालय में आप अर्ध
तो तब आजी जब मैं भी बचपन से ही उसके समान कुलीगिरी करने का आदी होता। यदि आप उसे एक घंटे के अंदर एक सुनीत (साॅनेट) रचने के लिए कहें तो क्या वह रच सकेगा? मैं आपको आधे घंटे के अंदर रचना करके दिखाता हूं। परंतु इसलिए आप यदि उस श्रमिक को ताना मारें कि ‘अरे, तुम साॅनेट की रचना शीर्घतीपूर्वक नहीं कर सके, इसके लिए
तुम्हें लाज आनी चाहिए’ तब क्या कहेगा वह, ‘बचपन से कविता करना मुझे किसी ने सिखाया नहीं।’ अपने कार्यालय में आप अर्ध