मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



उदार मित्रों का सहयोग

कोल्हू पेरते समय राजबंदियों में से एक-दो बंदी, जो उधर गुप्त रूप से आ सकते थे, आकर मेरी सहायता करते। इतना ही नहीं, मेरे लगातार ‘ना-नु’ करने के बाद भी और उनके दुःख, कष्ट, मुझसे अधिकक होते हुए भी राजबंदियों में से कई जन मुझे अपने कपड़े भी नहीं धोने देते, न ही अपना थाल-कटोरा मांजने देते। मेरे कपड़े धोने तथा बरतन मांजने के संबंध में कई बार पेटी अफसर तथा वाॅर्डर लोग उनसे धक्का-मुक्की करते, गालियां देते;


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उदार मित्रों का सहयोग

कोल्हू पेरते समय राजबंदियों में से एक-दो बंदी, जो उधर गुप्त रूप से आ सकते थे, आकर मेरी सहायता करते। इतना ही नहीं, मेरे लगातार ‘ना-नु’ करने के बाद भी और उनके दुःख, कष्ट, मुझसे अधिकक होते हुए भी राजबंदियों में से कई जन मुझे अपने कपड़े भी नहीं धोने देते, न ही अपना थाल-कटोरा मांजने देते। मेरे कपड़े धोने तथा बरतन मांजने के संबंध में कई बार पेटी अफसर तथा वाॅर्डर लोग उनसे धक्का-मुक्की करते, गालियां देते;


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