परंतु इस तरह के कष्ट झेलकर भी ये उदार तथा स्नेही लोगा मेरे काम करते रहते। उनको रोकने का मैंने बहुत प्रयास किया। कभी-कभी उनके कपड़े गुपचुप धो डाले। जब उन्हें पता चला तब उनके मन को भारी ठेस पहंुची। इतनी कि वे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए मुझसे प्रार्थना करने लगे। जब मैंने इस बात का अनुभव किया कि यदि मैंने उनकी सहायता अस्वीकार की तो सहायता देने में जितना कष्ट होता, उससे कहीं अधिक उन्हें मनःक्लेश होगा। तब मंैने निश्चय किया कि इन
परंतु इस तरह के कष्ट झेलकर भी ये उदार तथा स्नेही लोगा मेरे काम करते रहते। उनको रोकने का मैंने बहुत प्रयास किया। कभी-कभी उनके कपड़े गुपचुप धो डाले। जब उन्हें पता चला तब उनके मन को भारी ठेस पहंुची। इतनी कि वे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए मुझसे प्रार्थना करने लगे। जब मैंने इस बात का अनुभव किया कि यदि मैंने उनकी सहायता अस्वीकार की तो सहायता देने में जितना कष्ट होता, उससे कहीं अधिक उन्हें मनःक्लेश होगा। तब मंैने निश्चय किया कि इन