मृत्यु-मरण। वह तो निस्संदेह इस जीवन से मधुर है। मुझे दो-चार बार अपनी निर्वाचन की यातनाएं असहनीय लगी और आत्महत्या आकर्षक प्रतीत होने लगी थी। एक बार तब, जब मैं मार्सेलिस से पुनः पकडे़ जाने के बाद एड़न के आस-पास भयानक गरमी में तथा यंत्रणाओं में बंद किया गया था। दूसरी बार तब, जब इस कोल्हू पेरने में चक्कर आ गया था। दोनों बार मन तथा बुद्वि का प्रबल टकराव होते-होते बुद्वि के लगभग चारों खाने चित होने की स्थिति बन गई थी और एक-दो
मृत्यु-मरण। वह तो निस्संदेह इस जीवन से मधुर है। मुझे दो-चार बार अपनी निर्वाचन की यातनाएं असहनीय लगी और आत्महत्या आकर्षक प्रतीत होने लगी थी। एक बार तब, जब मैं मार्सेलिस से पुनः पकडे़ जाने के बाद एड़न के आस-पास भयानक गरमी में तथा यंत्रणाओं में बंद किया गया था। दूसरी बार तब, जब इस कोल्हू पेरने में चक्कर आ गया था। दोनों बार मन तथा बुद्वि का प्रबल टकराव होते-होते बुद्वि के लगभग चारों खाने चित होने की स्थिति बन गई थी और एक-दो