जिससे संपूर्ण राष्ट्र का उद्वार होगा, हो सकता है, भला अब उसका क्या? उसका उचित तथा यथाप्रमाण उपयोग नहीं होता, यह एक तरह से सत्य है। परंतु इस तरह जहां अन्य भारी-भरकम यंत्र चकनाचूर हो जाते हैं वहां इसलिए कि गुप्त, अज्ञात यातनाओं की मार सहने के लिए उपयुक्त हो, इस कार्य को करवाने के लिए यह कर्तृव्य शक्ति का यंत्र नहीं बनाया, यह कैसे कह सकते हैं? राष्ट्रोद्वार की मुठभेड़ों में सैकड़ों महत्तवपूर्ण चैकियों पर लड़ना पड़ता है और उसमें
जिससे संपूर्ण राष्ट्र का उद्वार होगा, हो सकता है, भला अब उसका क्या? उसका उचित तथा यथाप्रमाण उपयोग नहीं होता, यह एक तरह से सत्य है। परंतु इस तरह जहां अन्य भारी-भरकम यंत्र चकनाचूर हो जाते हैं वहां इसलिए कि गुप्त, अज्ञात यातनाओं की मार सहने के लिए उपयुक्त हो, इस कार्य को करवाने के लिए यह कर्तृव्य शक्ति का यंत्र नहीं बनाया, यह कैसे कह सकते हैं? राष्ट्रोद्वार की मुठभेड़ों में सैकड़ों महत्तवपूर्ण चैकियों पर लड़ना पड़ता है और उसमें