बुद्वि का यह अंतिम कारण जान हथेली पर लिए उस अवस्था में स्वीकार किया। मन स्थिर हो गया। यही ठाणे के कारागार में भी किया था। उसका स्मरण हो आया। उस दिन से पुनः मैं एक बार आत्महत्या के कगार पर जाकर खड़ा हो गया था, रत्नागिरी की जेल में। परंतु वह आगे की बात है।
मरंेगे तो वैसे ही मरंेगे
इस तरह के कृत-निश्चय में रात व्यतीत हो गई। इतना ही नहीं, उपर्युक्त तर्क का उपयोग करके और इस तरह उपदेश करते हुए कि यदि किसी को भी मरना है तो ं ं ं ंइसी तरह मरे,
बुद्वि का यह अंतिम कारण जान हथेली पर लिए उस अवस्था में स्वीकार किया। मन स्थिर हो गया। यही ठाणे के कारागार में भी किया था। उसका स्मरण हो आया। उस दिन से पुनः मैं एक बार आत्महत्या के कगार पर जाकर खड़ा हो गया था, रत्नागिरी की जेल में। परंतु वह आगे की बात है।
मरंेगे तो वैसे ही मरंेगे
इस तरह के कृत-निश्चय में रात व्यतीत हो गई। इतना ही नहीं, उपर्युक्त तर्क का उपयोग करके और इस तरह उपदेश करते हुए कि यदि किसी को भी मरना है तो ं ं ं ंइसी तरह मरे,