यह निश्चय दृढ़ होता कि भविष्य में जो यातनाएं भुगतनी हैं वे भी कर्तव्य ही हैं। ये चंद घड़ियां उस कोल्हू के कठोर अभिशाप में वरदान समान ही थी।
उस समय मैंने देखा कि उधर आए हुए राजबंदियों में प्रायः मेरे जैसे ही पच्चीस
के आस-पास की आयु के थे। उनकी शिक्षा अधुरी थी। राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि आवश्यक विषयों का उन्हें अत्यंत कम ज्ञान हुआ था और यह स्वभाविक ही था। तथापि मुझे कभी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि इस कारण उनके उत्कृष्ट
यह निश्चय दृढ़ होता कि भविष्य में जो यातनाएं भुगतनी हैं वे भी कर्तव्य ही हैं। ये चंद घड़ियां उस कोल्हू के कठोर अभिशाप में वरदान समान ही थी।
उस समय मैंने देखा कि उधर आए हुए राजबंदियों में प्रायः मेरे जैसे ही पच्चीस
के आस-पास की आयु के थे। उनकी शिक्षा अधुरी थी। राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि आवश्यक विषयों का उन्हें अत्यंत कम ज्ञान हुआ था और यह स्वभाविक ही था। तथापि मुझे कभी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि इस कारण उनके उत्कृष्ट