गंदगी से भरपूर, अपमानजनक उस कोल्हू के काम से थके-मांदे वे राजबंदी उस हौज पर घड़ी भर को गुपचुप इकट्ठा होते और इस तरह के उदात्त संवाद करते राष्ट्रीय सुख-सपने संजाते जब तन्मय हो जाते तब उनके मनोधैर्य की धार, जो दिन भर की यातनाओं के आघात सहते-सहते भोथरी हो जाती थी, पुनः पैनी हो जाती। उनके मुख पर नवतेज दमकता और उठते समय हर्ष तथा पे्रमपूर्वक एक-दूसरे से विदा लेकर वे भारतीय नवयुवक अपनी-अपनी चाली में बंद होने चले जाते।
प्रकरण-12
गंदगी से भरपूर, अपमानजनक उस कोल्हू के काम से थके-मांदे वे राजबंदी उस हौज पर घड़ी भर को गुपचुप इकट्ठा होते और इस तरह के उदात्त संवाद करते राष्ट्रीय सुख-सपने संजाते जब तन्मय हो जाते तब उनके मनोधैर्य की धार, जो दिन भर की यातनाओं के आघात सहते-सहते भोथरी हो जाती थी, पुनः पैनी हो जाती। उनके मुख पर नवतेज दमकता और उठते समय हर्ष तथा पे्रमपूर्वक एक-दूसरे से विदा लेकर वे भारतीय नवयुवक अपनी-अपनी चाली में बंद होने चले जाते।
प्रकरण-12