मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



अंदमान में संगठन और प्रचार

कोल्हू पर काम करते-करते मैं केवल राजबंदियों की स्थिति ही आजमा सका, ऐसा नहीं। थोड़ा-बहुत, कुल मिलाकर अंदमान की सारी स्थिति का आकलन मुझे होने लगा। बाहर के जिन लोगों के मन में हजार आपत्तिायों के बाद भी मेरे प्रति जो आद-भाव तथा प्रेम था, वे हाथ पर हाथ धरे न बैठते, मेरे साथ कुछ-न-कुछ संबंध जोड़ने का प्रयास करते रहे। इस अवस्था से मुझे दिखाई दिया कि प्रयास करने से यहां भी कुछ कार्यो में सफलता मिल सकती है,


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अंदमान में संगठन और प्रचार

कोल्हू पर काम करते-करते मैं केवल राजबंदियों की स्थिति ही आजमा सका, ऐसा नहीं। थोड़ा-बहुत, कुल मिलाकर अंदमान की सारी स्थिति का आकलन मुझे होने लगा। बाहर के जिन लोगों के मन में हजार आपत्तिायों के बाद भी मेरे प्रति जो आद-भाव तथा प्रेम था, वे हाथ पर हाथ धरे न बैठते, मेरे साथ कुछ-न-कुछ संबंध जोड़ने का प्रयास करते रहे। इस अवस्था से मुझे दिखाई दिया कि प्रयास करने से यहां भी कुछ कार्यो में सफलता मिल सकती है,


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