अतः थोड़ी मात्रा में ही क्यों न हो, इस कारावास से ही प्रारंभ करें।
अंदमान में संगठन
कार्य का प्रसार करना संभव है और यदि संभव है तो कम ही सही, पर संगठन करना हमारा कर्तव्य है। कारावास की यातनाएं भोगना तथा एकांत बंदीवासजन्य कर्मशून्यता का असह्म भार उठाकर निष्क्रिय खड़े रहने का एक कर्तव्य तो हम कर ही रहे थे। उसके साथ-साथ यदि कार्य प्रचार का और इस द्वीपांतर में जहां-जहां निर्वासित होंगे वहां-वहां भी जातीय चैतन्य का संचार करने का सक्रिय कार्य भी थोड़ा-बहुत कर सकें,
अतः थोड़ी मात्रा में ही क्यों न हो, इस कारावास से ही प्रारंभ करें।
अंदमान में संगठन
कार्य का प्रसार करना संभव है और यदि संभव है तो कम ही सही, पर संगठन करना हमारा कर्तव्य है। कारावास की यातनाएं भोगना तथा एकांत बंदीवासजन्य कर्मशून्यता का असह्म भार उठाकर निष्क्रिय खड़े रहने का एक कर्तव्य तो हम कर ही रहे थे। उसके साथ-साथ यदि कार्य प्रचार का और इस द्वीपांतर में जहां-जहां निर्वासित होंगे वहां-वहां भी जातीय चैतन्य का संचार करने का सक्रिय कार्य भी थोड़ा-बहुत कर सकें,