तो उसके द्वारा मातृभूमि की दोहरी सेवा करने का पुण्य क्यों न सिद्व किया जाए। इस प्रकार के विचारों से प्रेरित होकर अंदमान से प्रचार कार्य प्रारंभ करने का निश्चय किया।
राजबंदियों का शिक्षण
सर्वप्रथम राजबंदियों का शिक्षण कार्य हाथ में लेने का निश्चय किया। इस एक पखवाड़े में ही बंदियों में से जो लोग बवंडर में ऊपरी तौर पर आने के कारण इस आंदोलन के सर्वथा अनुकूल नहीं थे, प्रथमतः उनके गले में यह बात उतारकर इस आंदोलन का अंतरंग
तो उसके द्वारा मातृभूमि की दोहरी सेवा करने का पुण्य क्यों न सिद्व किया जाए। इस प्रकार के विचारों से प्रेरित होकर अंदमान से प्रचार कार्य प्रारंभ करने का निश्चय किया।
राजबंदियों का शिक्षण
सर्वप्रथम राजबंदियों का शिक्षण कार्य हाथ में लेने का निश्चय किया। इस एक पखवाड़े में ही बंदियों में से जो लोग बवंडर में ऊपरी तौर पर आने के कारण इस आंदोलन के सर्वथा अनुकूल नहीं थे, प्रथमतः उनके गले में यह बात उतारकर इस आंदोलन का अंतरंग