दृष्टि-भेंट हो जाती। कभी-कभी पूर्व सांठगांठ में कदाचित् सफलता मिली तो गुपचुप बातें करना भी संभव होता।
एक महीने-दो महीने के स्ािान परिवर्तन के कारण नए तथा अन्य राजबंदियों से जिस तरह बात करने का अवसर प्राप्त होता, उसी तरह आपसी बातचीत की और दो सुविधाएं इस कारागृह में प्राप्त होती। वे थी-रहने की कोठरी के ऊपर की खिड़की और बिलकुल भूमि में प्राप्त होती। वे थी- रहने की कोठरी के ऊपर की खिड़की और बिलकुल भूमि से लगी हुई जाली।
दृष्टि-भेंट हो जाती। कभी-कभी पूर्व सांठगांठ में कदाचित् सफलता मिली तो गुपचुप बातें करना भी संभव होता।
एक महीने-दो महीने के स्ािान परिवर्तन के कारण नए तथा अन्य राजबंदियों से जिस तरह बात करने का अवसर प्राप्त होता, उसी तरह आपसी बातचीत की और दो सुविधाएं इस कारागृह में प्राप्त होती। वे थी-रहने की कोठरी के ऊपर की खिड़की और बिलकुल भूमि में प्राप्त होती। वे थी- रहने की कोठरी के ऊपर की खिड़की और बिलकुल भूमि से लगी हुई जाली।