कारागृह के सातों विभाग फूल की पंखुड़ियों की तरह एक केंद्र से निकलकर फेले हुए होने के कारण प्रत्येक विभाग का अंागन अगले विभाग की पीठ से सटा हुआ था। अतः प्रत्येक विभाग की इमारत से पिछवाड़े के विभाग से और आंगन में खिड़की पर चढे़ हुए मनुष्य से बात करना संभव होता, परंतु यह कार्य बहुत संकट का था।
खिड़कियांे पर वार्त्तालाप
कोठरी में पड़े लकड़ी के तख्त को खड़ा करके उस दो पुरूष ऊंचाई की छोटी-सी खिड़की की सलाखों से लटककर, इसके बावजुद कि हाथ तनाव से टूटता हुआ महसुस होने लगता,
कारागृह के सातों विभाग फूल की पंखुड़ियों की तरह एक केंद्र से निकलकर फेले हुए होने के कारण प्रत्येक विभाग का अंागन अगले विभाग की पीठ से सटा हुआ था। अतः प्रत्येक विभाग की इमारत से पिछवाड़े के विभाग से और आंगन में खिड़की पर चढे़ हुए मनुष्य से बात करना संभव होता, परंतु यह कार्य बहुत संकट का था।
खिड़कियांे पर वार्त्तालाप
कोठरी में पड़े लकड़ी के तख्त को खड़ा करके उस दो पुरूष ऊंचाई की छोटी-सी खिड़की की सलाखों से लटककर, इसके बावजुद कि हाथ तनाव से टूटता हुआ महसुस होने लगता,