वह थी पुस्तकों के विषय में।
पुस्तकों की कमी
प्रथमतः मेरी अपनी जो पुस्तकें थी, उन्हें थाने में ही मेरी निजी संपत्तिा होने के कारण जब्त कर लिया गया था। अंदमान में राजबंदियों के पास जो पुस्तकें थी वे उनके आंदोलन की मासिक मत्रिकाएं थी। ये पुस्तकें भी सप्ताह मंे रविवार को ही पढ़ने को मिलती और बहुत कत थी। वे थी-श्री रामकृष्ण तथा विवेकानंद की कुछ पुस्तकें, टाॅलस्टाॅय की ‘डल त्मसपहपवद’ आदि एक-दो पुस्ततकें और शेष एनी बेसेंट
वह थी पुस्तकों के विषय में।
पुस्तकों की कमी
प्रथमतः मेरी अपनी जो पुस्तकें थी, उन्हें थाने में ही मेरी निजी संपत्तिा होने के कारण जब्त कर लिया गया था। अंदमान में राजबंदियों के पास जो पुस्तकें थी वे उनके आंदोलन की मासिक मत्रिकाएं थी। ये पुस्तकें भी सप्ताह मंे रविवार को ही पढ़ने को मिलती और बहुत कत थी। वे थी-श्री रामकृष्ण तथा विवेकानंद की कुछ पुस्तकें, टाॅलस्टाॅय की ‘डल त्मसपहपवद’ आदि एक-दो पुस्ततकें और शेष एनी बेसेंट