मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



‘इसने पुस्तक दी और उसने ली, हुजूर! क्हते हुए पुनः हल्ला-गुल्ला होता, अभियोग लगाया जाता और पर्यवेक्षक (सुपरिंटेंडेंट) भी उस अपराध से संतप्त होकर चार-चार दिनों की हथकड़ी का दंड ठोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ता। घड़ी भर पुस्तक पढ़ने के घोर अपराध में चार-चार दिन तक राजबंदियों को हथकड़ी में लटकाकर दिन भर खड़ा किया जाता। हो सकता है कि रामकृष्ण के चरित्र से पढ़े हुए तत्वों को परखने के अनुशासन का राजबंदी पालन करें, इसलिए उस तरह नियम और हथकड़ी में लटकाने की व्यवस्था की गई हो।


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‘इसने पुस्तक दी और उसने ली, हुजूर! क्हते हुए पुनः हल्ला-गुल्ला होता, अभियोग लगाया जाता और पर्यवेक्षक (सुपरिंटेंडेंट) भी उस अपराध से संतप्त होकर चार-चार दिनों की हथकड़ी का दंड ठोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ता। घड़ी भर पुस्तक पढ़ने के घोर अपराध में चार-चार दिन तक राजबंदियों को हथकड़ी में लटकाकर दिन भर खड़ा किया जाता। हो सकता है कि रामकृष्ण के चरित्र से पढ़े हुए तत्वों को परखने के अनुशासन का राजबंदी पालन करें, इसलिए उस तरह नियम और हथकड़ी में लटकाने की व्यवस्था की गई हो।


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