पुस्तकें पढ़ने के मार्ग में बाधा डालने में बारी साहब अग्रणी रहते। इस पंडित प्रवर का यह सिद्वांत था कि पुस्तक पठन से भारतीय युवक पागल हो जाते हैं। पीछे जो श्रीयुत ं ं ं ंके पागल होने की बात बारी साहब ने मुझसे कही थी, उसमें भी उसने कहा था, ‘‘वे भी थियोसाॅफिकल पुस्तक पढ़ते हैं, इसलिए सरफिरे बन गए।’’ अच्छा, थियोसाॅफिकल अथवा रामकृष्ण आदि की भोली-भाली, मनुष्य को पागल बनानेवाली पुस्तकों को छोड़ दिया जाए तो क्या वह राजनीति की
पुस्तकें पढ़ने के मार्ग में बाधा डालने में बारी साहब अग्रणी रहते। इस पंडित प्रवर का यह सिद्वांत था कि पुस्तक पठन से भारतीय युवक पागल हो जाते हैं। पीछे जो श्रीयुत ं ं ं ंके पागल होने की बात बारी साहब ने मुझसे कही थी, उसमें भी उसने कहा था, ‘‘वे भी थियोसाॅफिकल पुस्तक पढ़ते हैं, इसलिए सरफिरे बन गए।’’ अच्छा, थियोसाॅफिकल अथवा रामकृष्ण आदि की भोली-भाली, मनुष्य को पागल बनानेवाली पुस्तकों को छोड़ दिया जाए तो क्या वह राजनीति की