परिणाम होता। गतकालीन ऐतिहासिक वीर काव्य तथा वीर गाथा अथवा गीता का कर्मयोग अथवा उपनिषदों का ब्रह्मवाद पढ़कर कई बार उन राजबंदियों का गुप्त चैतन्य उद्दीप्त होता, कई बार आत्मलज्जा नष्ट हो जाती और मन आत्मगौरव से उल्लसित होकर यातनाओं को धिक्कारते हुए गरजने लगता। कारागृह के ं ं ंऔर जिस अर्थ से अधिकारियों का कहना होता कि पुस्तकें अवश्य पढ़ने के लिए देनी चाहिए।
प्रथमतः हमने ऐसी प्रशिक्षा का आदान-प्रदान आरंभ किया जो पुस्तक के बिना
परिणाम होता। गतकालीन ऐतिहासिक वीर काव्य तथा वीर गाथा अथवा गीता का कर्मयोग अथवा उपनिषदों का ब्रह्मवाद पढ़कर कई बार उन राजबंदियों का गुप्त चैतन्य उद्दीप्त होता, कई बार आत्मलज्जा नष्ट हो जाती और मन आत्मगौरव से उल्लसित होकर यातनाओं को धिक्कारते हुए गरजने लगता। कारागृह के ं ं ंऔर जिस अर्थ से अधिकारियों का कहना होता कि पुस्तकें अवश्य पढ़ने के लिए देनी चाहिए।
प्रथमतः हमने ऐसी प्रशिक्षा का आदान-प्रदान आरंभ किया जो पुस्तक के बिना