बात कर रहे थे’ इस तरह दबाकर कहते हुए हथकड़ी का दंड सहते कुछ भी करके सप्ताह में दो-चार ऐतिहासिक अध्याय मैं उनके सामने कहने लगा। प्रथमतः हिंदुस्थान का वेदकाल से इतिहास, उसके विभाग और रूपरेखा बताकर उसके पश्चात् उनमें से महान् काल के शासनकर्त्ताओं के चरित्रों का वर्णन करता, उसके उपरांत यूरोपीय अर्वाचीन इतिहास-नेपोलियन, मैजिनी, गैरीबाल्डी और विशेषकर तत्कालीन डगमगाते रूस के प्रचंड आंदोलन का इतिहास सुनाता। उसके पश्चात् अर्थशास्त्र
बात कर रहे थे’ इस तरह दबाकर कहते हुए हथकड़ी का दंड सहते कुछ भी करके सप्ताह में दो-चार ऐतिहासिक अध्याय मैं उनके सामने कहने लगा। प्रथमतः हिंदुस्थान का वेदकाल से इतिहास, उसके विभाग और रूपरेखा बताकर उसके पश्चात् उनमें से महान् काल के शासनकर्त्ताओं के चरित्रों का वर्णन करता, उसके उपरांत यूरोपीय अर्वाचीन इतिहास-नेपोलियन, मैजिनी, गैरीबाल्डी और विशेषकर तत्कालीन डगमगाते रूस के प्रचंड आंदोलन का इतिहास सुनाता। उसके पश्चात् अर्थशास्त्र