के गूढ़ तत्तव और शासन विज्ञान और राजनीति शासन की चर्चा करता। आगे चलकर जैसे-जैसे राजबंदियों की संख्या बढ़ती गई और हड़ताल, बखेडे़, टंटे, झगड़े होते-होते अधिकारियों की ऐसी अवस्था हो गई कि ‘तोबा, अपनी छाछ से, इन कुत्तों से छुड़ा। इकट्ठा बैठो, पढ़ो, जो मन में आए करो, परंतु काम करो और आंदोलन करके हमें तंग मत करो’, तब इन्हीं संक्षिप्त संवादों का रूपांतर होने लगा। रविवार की बैठक में चर्चा छिड़ती, जो सप्ताह भर साधारणतः भंग रही थी। परंतु
के गूढ़ तत्तव और शासन विज्ञान और राजनीति शासन की चर्चा करता। आगे चलकर जैसे-जैसे राजबंदियों की संख्या बढ़ती गई और हड़ताल, बखेडे़, टंटे, झगड़े होते-होते अधिकारियों की ऐसी अवस्था हो गई कि ‘तोबा, अपनी छाछ से, इन कुत्तों से छुड़ा। इकट्ठा बैठो, पढ़ो, जो मन में आए करो, परंतु काम करो और आंदोलन करके हमें तंग मत करो’, तब इन्हीं संक्षिप्त संवादों का रूपांतर होने लगा। रविवार की बैठक में चर्चा छिड़ती, जो सप्ताह भर साधारणतः भंग रही थी। परंतु